
वीडियो गेम छोड़ अपनाया वैराग्य: 13 साल का बालक दीक्षा ग्रहण करेगा
आज के दौर में जहां किशोर उम्र के बच्चे आधुनिक जीवनशैली और पढ़ाई-लिखाई में व्यस्त रहते हैं, वहीं एक 13 वर्षीय बालक ने आध्यात्मिक मार्ग (jain dharm) को अपनाकर सबको चौंका दिया है। टेक्सटाइल व्यवसाय से जुड़े परिवार का यह किशोर अब जल्द ही जैन संत के रूप में दीक्षा (jain diksha) लेने जा रहा है।
मूल रूप से राजस्थान के पाली जिले के रोहट से संबंध रखने वाला यह परिवार फिलहाल सूरत में निवास करता है। परिवार के बेटे ने कम उम्र में ही सांसारिक सुख-सुविधाओं से दूरी बनाकर संयम और साधना का जीवन चुन लिया है।
पिता कारोबारी, करोडा का टर्नओवर
बताया जा रहा है कि यह निर्णय अचानक नहीं था, बल्कि कई वर्षों की साधना और अभ्यास का परिणाम है। परिवार के अनुसार, बालक बचपन से ही धार्मिक प्रवचनों की ओर आकर्षित था और धीरे-धीरे उसने वैराग्य की राह पर चलने का संकल्प लिया।
उसकी इच्छाशक्ति को परखने के लिए परिवार और संतों ने उसे कठोर अनुशासन में रखा। कम उम्र में ही उसने साधुओं की तरह जीवन जीते हुए तपस्या और नियमों का पालन किया। इस दौरान उसने कई दिनों तक कठिन साधना की और नंगे पैर यात्राएं भी कीं।
500 KM पैदल यात्रा से किया संकल्प मजबूत

पिछले कुछ वर्षों में उसने धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया और संतों के मार्गदर्शन में विभिन्न तीर्थ स्थलों की लंबी यात्राएं कीं। जानकारी के अनुसार, वह अब तक हजारों किलोमीटर पैदल चल चुका है, जो उसकी दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।
23 अप्रैल को पालीताणा में दीक्षा ग्रहण करेगा
अब यह किशोर आगामी 23 अप्रैल को गुजरात के पालीताणा में जैन दीक्षा ग्रहण करेगा। इस अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
यह घटना न केवल एक परिवार के लिए, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है, जहां एक बालक ने कम उम्र में ही त्याग और संयम का मार्ग चुनकर अलग पहचान बनाई है।
जैन धर्म, दीक्षा, धार्मिक समाचार, पाली न्यूज, राजस्थान न्यूज़, आज की खबर
✍️ Kailash Choudhary
जैन समाज की यह खबर भी रही सुर्ख़ियों में
डोम्बिवली में हुआ साध्वीश्री संयमलता का पदार्पण