⚖️ QUICK UPDATE
- हाईकोर्ट ने संत फूलपुरी की गिरफ्तारी पर लगाई रोक
- मामले में पहले से दर्ज FIR पर भी मिल चुका है स्टे
- आश्रम की संपत्ति हड़पने के आरोपों को बताया गया विवादित
- अगली सुनवाई तक अंतरिम राहत जारी
जाडन आश्रम (Om Ashram) को लेकर चल रहे विवाद में संत फूलपुरी के खिलाफ थाने में दो एफआईआर दर्ज है। मामले में जोधपुर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए संत फूलपुरी (Sant Fulpuriji) की गिरफ्तारी पर स्टे लगाते हुए अंतरिम राहत दी है।
जाडन आश्रम विवाद में हाईकोर्ट सख्त, संत फूलपुरी को राहत

📍 क्या है पूरा मामला?
पाली जिले के जाडन ॐ आश्रम (om ashram pali) से जुड़ा विवाद अब न्यायिक स्तर पर पहुंच चुका है। आश्रम प्रबंधन और संपत्तियों को लेकर उठे आरोपों के बीच संत फूलपुरी के खिलाफ अलग-अलग थानों में मामले दर्ज किए गए थे, जिन पर अब अदालत की नजर है।
⚖️ हाईकोर्ट का फैसला
जोधपुर हाईकोर्ट (jodhpur high court) ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए संत फूलपुरी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी।
अदालत ने मामले में राहत देते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी नहीं की जाएगी।
बचाव पक्ष की दलील
संत फूलपुरी की ओर से पेश अधिवक्ता लक्षित चौधरी ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि—
- इससे पहले दर्ज एक FIR में भी हाईकोर्ट स्टे दे चुका है
- वर्तमान FIR भी उसी प्रकार की और निराधार बताई गई
बचाव पक्ष का कहना है कि आरोपों में ठोस आधार का अभाव है।
📌 आरोप क्या हैं?
शिवपुरा थाने में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार—
- शिकायतकर्ता ने संत फूलपुरी पर आश्रम की संपत्तियों को लेकर षड्यंत्र का आरोप लगाया
- दावा किया गया कि महामंडलेश्वर महेश्वरानंद का स्वास्थ्य कमजोर है
- ऐसी स्थिति में उनकी सहमति और निर्णय क्षमता पर सवाल उठाए गए
आरोपों में यह भी कहा गया कि इस स्थिति का लाभ उठाकर ट्रस्ट प्रबंधन पर नियंत्रण की कोशिश की गई।
📍 पहले भी दर्ज हो चुका है मामला
इससे पहले 13 जनवरी को पाली शहर के कोतवाली थाने में भी मामला दर्ज हुआ था।
जिसमें आरोप लगाया गया कि संत महेश्वरानंद (swamy maheshwaranadji) से दस्तावेजों पर सहमति लेने को लेकर विवाद हुआ।
जाडन ॐ आश्रम से जुड़ा यह मामला केवल धार्मिक या सामाजिक नहीं, बल्कि कानूनी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया है।
अदालत के अंतिम निर्णय से ही पूरे विवाद की दिशा तय होगी।
⚠️ DISCLAIMER
यह समाचार उपलब्ध जानकारी और आधिकारिक रिपोर्ट्स के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा।
Om Ashram Case: ओम आश्रम में उठे सवाल! ट्रस्ट विवाद का पूरा सच | Pali News