चैत्र कृष्ण दशमी पर पीपल पूजन और नल-दमयंती कथा के श्रवण के साथ सुख-समृद्धि की कामना

मुंबई। देशभर में आज श्रद्धा और भक्ति के साथ दशा माता व्रत ( Dasha Mata Vrat 2026) मनाया गया। चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष रूप से राजस्थान, मालवा, महाराष्ट्र और गुजरात में बड़ी आस्था के साथ मनाया जाता है।
मुंबई में भी सुबह से ही मंदिरों और पीपल वृक्षों के नीचे महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
🌿 पीपल पूजन और डोरा बांधने की परंपरा
मान्यता है कि इस दिन पीपल वृक्ष को भगवान विष्णु का स्वरूप मानकर उसकी पूजा की जाती है। महिलाओं ने पीपल की 10 परिक्रमा कर कच्चे सूत का डोरा बांधा।
धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस व्रत को करने और डोरा धारण करने से परिवार के कष्ट दूर होते हैं तथा घर की बिगड़ी हुई दशा सुधर जाती है।

नल-दमयंती कथा का विशेष महत्व
दशा माता व्रत के अवसर पर महिलाओं ने नल-दमयंती की पौराणिक कथा का श्रवण किया। इस कथा से जीवन में धैर्य, संयम और विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।
धार्मिक जानकारों के अनुसार, कथा श्रवण से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

परंपराएं आज भी जीवंत
देश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही तस्वीरें यह दर्शाती हैं कि आधुनिक समय में भी हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराएं उतनी ही जीवंत और सशक्त हैं।
🎤 रिपोर्ट
मुंबई से अनिल परमार की रिपोर्ट
मंगल मीडिया न्यूज़
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